Wednesday, 10 June 2015

Kya kare kya na kare...



काश के ये प्यार जैसी चीज़ न होती  .... 
न सपने होते ,
न हम दीवाने होते  ....
 न इश्क़ के बहाने होते ,
न झूठे-सच्चे अफ़साने होते ....
न देर रातें बातें होती ,
न अनगिनत मुलाकातें होती ....
  न शामें सुहानी लगती ,
न सुबह बेगानी लगती ....
न कहानियां बनती ,
न कोई कलाकार बनता ....
 न दिल को अफ़सोस होता ,
न प्यार में कोई सोज़ होता ....
काश के बस एक एहसास होता ,
और ये नादान दिल भी अपने पास होता .......




Thursday, 30 April 2015

Udaan !

 एक परिंदा आज़ादी की तलाश में 
कभी गिरते कभी संभलते 
कभी पिंजरे से निकलने के प्रयास में 
मेहनत के रंग दिखलाता है
उड़ना चाहता है वो खुले आसमान के तले 
पर फिर भी उड़ान से घबराता है 
पँख समेटके कभी निराशा से उसका मन भर जाता है 
पर फिर भी कोशिशों से फिर वो साहस दिखलाता है 
डरता है की न खो दे वो ये ज़िन्दगी 
पर फिर भी अपने दिल को समझाता है 
हार के पथ पे चलने से 
वो हमेशा जी छुड़ाता है 
आज़ादी की राह में बस 
अपने मन को ढांढस बंधवाता है 
और कोशिशों के पथ पर 
जीत का बिगुल बजाता है 
बस उड़ने की चाह को लिए 
अपना सपना सच कराता है 
खुले आसमान के तले 
      बस उड़ा चला जाता है …
       बस उड़ा चला जाता है …

Saturday, 18 April 2015

सपनो का जहाँ !


काश के एक ऐसा आशियां होता ....
समन्दर की सहमी हंसी होती ....
 और सितारों के दरमियाँ आसमान होता .... 
काश के हर दिन खुशनुमा होता ....
चिड़ियों की चहचहाती आवाज़ होती....
और गुस्ताखियों में भी चंचलता तलाश होती....
काश के शाम  ढलते -ढलते बरसात होती .... 
मिट्टी की सौंधी खुशबू होती.... 
और मौसम की नटखट सादगी होती....
काश के सपने सच होते....
दिन ढलता और कहीं खो जाते हम....
रात के सन्नाटे में....
फिर सोते और सपने सजाते हम ....

Tuesday, 18 November 2014

तन्हाई की चादर...

 
तन्हाई की चादर लपेटे हुए ,
अकेले-अकेले से  क्यों लग रहे हो आज  .... 
सर्द हवाओं से डरते थे  तुम कभी ,
आज उसी फ़िज़ा में घुम हो तुम कहीं  .... 
क्या है इस मन की उलझन  ,
जो नम आँखों में दिख रही है  … 
सहर होने को है ,
पर फिर भी अँधेरा क्यों है आज  … 
जाने किस गली को जा रहे हो ,
आज तुम बहुत बेबस नज़र आ रहे हो  …
आज तुम बहुत बेबस नज़र आ रहे हो  …

Tuesday, 28 October 2014

Dhua-dhua sa ye jahan !


धुँआ-धुँआ है ये समां  … 
धुँआ-धुँआ है हर ज़र्रा  .... 
आज इस धुएँ में हमको जी लेने दे … 
गमो के ज़हर को आज पी लेने दे  .... 
कहता तो है ये दिल भी बहुत ,
दूर तलक जाने के लिए  … 
ज़िक्र करने से न बहल पाएगा  … 
ये ज़ालिम दिल न समझ पाएगा  … 
ओढ़ी हुई रज़ाई में ,
ये बचपन भी सिमट सा जाएगा  .... 
ये धुँआ तो है बनावटी 
बातों-बातों में खत्म हो जाएगा  .... 
गुमसुम न रह जाना तुम कहीं  .... 
क्यूँकि ये किस्सा दूर तलक जाएगा  …

Tuesday, 7 October 2014

DiL ChAhTa HaI !



तेरी इन आँखों में डूबने को दिल चाहता है  ....
वक़्त न निकल जाए ,
इस समुन्दर में बहने को दिल चाहता है  …
रूह से निकली आवाज़ की सुने तो ,
ख्वाबों को जीने का दिल चाहता है  .... 
कमज़ोरी को गले लगाये तो ,
शोरगुल में भी सन्नाटा सा छा जाता है   …
अजब सा जूनून है इस तनहा मन में ,
अजब सा है ये एहसास   ....
उलझन में फसा हुआ हूँ में एक मुसाफिर  ....
कोई राह दिखाए तो ,
प्यार करने को भी दिल चाहता है   …

Thursday, 3 July 2014

Tanha dil..!



गमो को छोड़ बहुत दूर जा रहा हूँ ,
वक़्त को छोड़ बहुत दूर जा रहा हूँ  ..
इस मासूम से पल में न जाने किस से घबरा रहा हूँ  ,
दर-दर भटक के न जाने किस को समझा रहा हूँ  ..
तन्हाई से डरता था में कभी ,
कभी खुदसे घबराता था  …
बारिश में भीगते-भीगते ,
बस अकेला चलता जाता था  … 
वक़्त ने ऐसी करवट ली ,
न जाने कितने गम दे गयी  …  
एक आस थी मन में जो बसी ,
बिखर गयी दिल की हर ख़ुशी  … 
रात हो या दिन , बस एक ख्याल आता है, 
सपनो में ऐ दोस्त सचाई से रूबरू क्यों नही कराता है  ....